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Showing posts from August, 2025

"बूँदों की रिमझिम में प्रकृति की धुन सुनाई देती है, जो मन को भीगाकर आत्मा को शीतल कर देती है।"

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किसी मौसम का झौंका था जो  इ स दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है  गये सावन में ये दीवारें यूँ सीली नहीं थीं न जाने इस दफ़ा क्यूँ इनमें सीलन आ गयी है दरारें पड़ गयी हैं और सीलन इस तरह बहती है जैसे ख़ुश्क रुख़सारों पे गीले आँसू चलते हों  ये बारिश गुनगुनाती थी, इसी छत की मुंडेरों पर ये घर की खिड़कियों के काँच पर उंगली से लिख जाती थी संदेसे बिलखती रहती है बैठी हुई अब बंद रोशनदानों के पीछे  दोपहरें ऐसी लगती हैं बिना मोहरों के खाली खाने रखे हैं न कोई खेलने वाला है बाज़ी और ना कोई चाल चलता है  न दिन होता है अब न रात होती है सभी कुछ रुक गया है वो क्या मौसम का झौंका था जो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है 💓💕⛈️🌧️💧💧 Santoshkumar B Pandey at 1.21Pm

ज़िन्दगी : आत्मा की मुस्कान में खिलती एक मधुर भाषा,जो हर चेहरे पर खुशी लिखती है !

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  ❣️ ज़िन्दगी — एक रहस्य भी है, एक यात्रा भी। कभी ये मुस्कुराहट बनकर चेहरे पर खिलती है, तो कभी आँसुओं की चुप्पी में छिप जाती है। कभी लगता है जैसे सब कुछ मिल गया, और कभी… जैसे खुद को ही खो बैठे। ले किन फिर भी…                            ज़िन्दगी रुकती नहीं। 🌿 ज़िन्दगी एक पाठशाला है — जहाँ हर दिन कुछ सिखाता है। 🌺 ज़िन्दगी एक तपस्या है — जहाँ धैर्य ही पूजा है। 🔥 ज़िन्दगी एक संग्राम है — जहाँ हर पल साहस की माँग होती है। 💞 ज़िन्दगी एक प्रेम है — जहाँ अपनापन ही सबसे बड़ी दौलत है। "ज़िन्दगी वही जो दूसरों के लिए जिए।" — यही तो सिखाते हैं हमारे संत, हमारे संस्कार, हमारा सनातन। संतोषकुमार भागीरथी पाण्डेय 💐🙏