जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी : जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं ।
खलीलाबाद कि पऋचीन बाजार हरीहरपुर थी। बाबू लल्लू राय रईस ने बाद में खलीलाबाद बाजार बसाया बाजार लगाने के लिए सभी को कर देना पड़ता था , कुछ साहूकार व मारवाड़ी ने अपने नाम के आगे राय जोड़ा जैसे कि प्रहलाद राय छपडिया , बाबू लल्लू राय रईस ने अगेंजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने खलीलाबाद के स्टेशन का दरवाज़ा अपने गांव के तरफ करवाया था जो कि आज भी है। बिधियानी की तीनो सड़क आज भी बाबू लल्लू राय रईस के नाम से है ( बाबू लल्लू राय मार्ग)।
इतिहास संपादित करें
संत कबीर नगर जिला 5 सितंबर 1997 को बनाया गया था नए जिले में बस्ती जिले के तत्कालीन बस्ती तहसील के 131 गांवों और सिद्धार्थ नगर जिले के तत्कालीन बांसी तहसील के 161 गांवों शामिल थे। 5 सितंबर 1997 से पहले यह बस्ती जिले का तहसील था।
विभाजन संपादित करें
इस जिले में तीन तहसील खलीलाबाद, मेहदावल और धनघटा है। इस जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र खलीलाबाद, मेहदावल और धनघटा है। ये सभी संत कबीर नगर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा हैं।
हैसर ब्लॉक संपादित करें
जिला पंचायत :- बलराम यादव
ग्राम प्रधान :- शिव प्रसाद मद्धेशिया सोनाड़ी हैंसर बाजार
हैंसर :- प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय में हैंसर, सूर्यवंशी लाल जगत बहादुर से सम्बन्धित था। स्वतंत्रता संग्राम में लाल जगत बहादुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार के दिन यहां साप्ताहिक बाजार लगता है। इस जगह का क्षेत्रफल केवल 91.4 हैक्टेयर है।
से दो किलोमीटर की दूर दक्षिण में स्थित कोचरी गांव में समय माता का मंदिर स्थित है।
रामलीला मैदान :-सोनाड़ी हैसर में स्थित रामलीला मैदान हर साल दशहरा में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है इस मैदान का रखरखाव अवधेश प्रसाद द्वारा किया जाता है।
बसन्त पंचमी के दिन सोनाड़ी में विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है।
वर्तमान प्रधान सोनाड़ी शिवप्रसाद मद्धेशिया के द्वारा यहाँ के मंदिर पर महिला स्नान घर का निर्माण कराया गया है। जो की इनकी वैश्विक सोच को दर्शाता है। इस स्नान घर के निर्माण हेतु सोनाड़ी एवं हैंसर की जनता का विशेष सहयोग रहा।
जिले के प्रमुख्य स्थान संपादित करें
महादेव मंदिर :- खलीलाबाद से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित तामा गांव में महादेव मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान तामेश्वर नाथ को समर्पित है। लोककथा के अनुसार मंदिर में स्थित मूर्ति तामा के समीप स्थित जंगल से प्राप्त हुई थी। राजा बंसी द्वारा इस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया था। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। काफी संख्या में भक्त इस मेले में सम्मिलित होते हैं।
मगहर :- यह शहर जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम में लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वही स्थान है जहां संत कवि कबीर की मृत्यु हुई थी। इस जगह पर संत कवि कबीर की एक समाधि मंदिर और एक मस्जिद स्थित है। इस मंदिर मस्जिद में हिन्दू और मुसलमान दोनों ही पूरी श्रद्धा के साथ यहां आते हैं।
खलीलाबाद :- खलीलाबाद, संत कबीर नगर जिले का मुख्यालय है। जो कि बाद में बाबू लल्लू राय रईस के द्वारा बसाया गया बाजार रगड़गंज को रगड़गंज खत्म कर के बाद में इस जगह की स्थापना काजी खलील-उर-रहमान ने की थी। उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम खलीलाबाद रखा गया था। वर्तमान समय में यह जगह विशेष रूप से हाथ से बने कपड़ों के बाजार के लिए प्रसिद्ध है। इस बाजार को बरधाहिया बाजार के नाम से जाना जाता है।
हैंसर :- प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय में हैंसर, सूर्यवंशी लाल जगत बहादुर से सम्बन्धित था। स्वतंत्रता संग्राम में लाल जगत बहादुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार के दिन यहां साप्ताहिक बाजार लगता है। इस जगह का क्षेत्रफल केवल 91.4 हैक्टेयर है।
हशेश्वरनाथ मंदिर :-खलीलाबाद से तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैंसर गांव में महादेव जी का मंदिर हशेश्वरनाथ धाम स्थित है। यह मंदिर भगवान तामेश्वर नाथ को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। काफी संख्या में भक्त इस मेले में सम्मिलित होते हैं।
धर्मसिंहवा बाजार :-धर्मसिंहवा बाजार संतकबीर नगर का बहुत ही पुराना कस्बा है। मेहदावल तहसील में स्थित इस कस्बे की कुल आबादी लगभग 8000 की है। यहाँ पर मौजूद पुरातात्विक अवशेष आज भी अपने अस्तित्व को पाने के लिये तरस रहे हैं। बताया जाता है कि गौतम बुद्ध जब सत्य की खोज के लिये जा रहे थे, तो वे यहाँ पर रूक कर विश्राम किये थे। यहाँ एक बोद्धस्तूप भी मौजूद है। यह कस्बा जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर जनपद के उत्तरी सीमा पर स्थित है। इस कस्बे से दो किमी के दूरी के बाद जनपद सिद्धार्थ नगर की सीमा शूरू हो जाती है। धर्मसिंहवा में थाना, बैंक, इन्टर कालेज, होम्योपैथिक अस्पताल,व विमलेश त्रिपाठी द्वारा संचालित सहज जन सेवा केंद्र मौजूद है।
बभनौली बाज़ार : यह गाँव हैसर बाज़ार से दस किलोमीटर तथा सिकरीगंज से १२ किमी पर स्थित है। यह बाज़ार बभनौली के पंडित तीर्थ राज मिश्र के द्वारा अपने दरवाज़े पर लगवाई गयी थी जो आज भी प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को उन्ही के दरवाज़े के सामने लगती है। इसी ख़ानदान के पंडित शिव पूजन मिश्र एक प्रसिद्ध पहलवान थे।बभनौली गाँव वहाँ के प्रसिद्ध मंदिर ओबा माई मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, प्रत्येक नवरात्र में मेला का आयोजन भी होता है । अगर कभी जाने का मौक़ा मिले तो इस मंदिर का दर्शन अवश्य करे।यहाँ मंदिर तक पहुचने के लिए दो रास्ते है १-- गोरखपुर से सिकरीगंज, फिर वहाँ से लोहरैया पहुँचे वहाँ से बभनौली के लिए साधन उपलब्ध है। २---हैसर बाज़ार से लोहरैया पहुँचे फिर वहाँ से बभनौली।
बलही- यह गांव जिला मुख्यालय से दक्षिण में लगभग पन्द्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस ग्राम में भगवान श्रीराम-जानकी एवं हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर है । जिसका ग्राम वासियों द्वारा वर्ष 2017 में जीर्णोद्धार करा कर नया रूप दिया गया। लोगों का मानना है कि लोग जो भी मनोकामना लेकर दर्शन करते हैं,अवश्य पूरा होता है । नाथ नगर यह खलीलाबाद से 15 किलोमीटर पर है नाथ नगर ब्लॉक भी है!
अमरडोभा'लेडुआ महुआ अमरडोभा संतकबीर नगर का एक तारीखी कसबा है यह एक बुनकरों का मुख्य असथान है!इस की कुल आबादी लगभग 10000 की है। जिसमें 75% के लगभग मुसलिम समुदाय के लोग है। यहाँ का गमछा बहुत मशहूर है। यहाँ हैनडलोम बहुत है जिससे गमछा चादर धोती कुरता और लुनगी यदि चीजें बनाई जाती है। यहाँ बुधवार को बाजार लगता है जो इलाके का बड़ा बाजार है। यह कसबा जिला मुख्यालय से 18 कीमी के दूरी पर जनपद के उत्तर में है। यहाँ जोनियर हाई स्कूल, इनटर कालेज, सहज सेवा केंद्र, अस्पताल मौजूद हैं।
रेल मार्ग :- जिले में दो रेलवे स्टेशन है खलीलाबाद, मगहर और रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से यहां पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग :- भारत के कई प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा संत कबीर नगर पहुंचा जा सकता है खलीलाबाद से
संत कबीर
मगहर, भारत
राजेसुल्तानपुर
== बाहरी कड़ियाँ ==उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में बाबू लल्लू राय रईस ने बहराइच बाबासाहब के स्थान पर चौदह बीघा जमीन दान कर दिया था और वहाँ पर दलथमभन नाम का कुआ भी खुलवाया।
मेरा गाँव ( भरवलिया पाण्डेय )





















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