जब तक मस्ती जिँदा है,तब तक हस्ती जिँदा है!

जब तक मस्ती जिँदा है,तब तक हस्ती जिँदा है,,
साथ निभाते जाओ खुद का,शख्सियत तुम्हारी उम्दा है

जी भरकर जीवन जिया करो, हर पल मेँ खुद को गढा करो,
टेढे मेढे जीवन पथ पर, कदम देखकर चला करो
एक एक पग जीवन रस हो,लक्ष्य साधती जीवन दृष्टि
लिख दो अपना जीवन पन्ना, रच दो अपनी अनुपम सृष्टि

मन अपना इतना खुला हुआ ,हर स्वर भीतर तक स्पर्श करे
मानवता की देहरी पर जीवन अपना उत्कर्ष गढे
ये भेद तो सारे ऊपर के है,अँतर्मन मे यह भाव रहे
विजय पराजय से ऊपर उठ, अपनी नयी उडान रहे,,,,



💞❤❤❤🌹🌹🌹😘

Santoshkumar B Pandey at 2.45Pm.

Comments

  1. सांकृत्य गोत्र के संबंध में जो जानकारी आपने दी है.. कृपया ये बताये कि वशिष्ठ के वंश मे से सांकृत्य आते है या विश्वामित्र के??

    ReplyDelete
    Replies
    1. सांकृत्य ऋषि वशिष्ठ के पौत्र!

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

ज़िन्दगी : आत्मा की मुस्कान में खिलती एक मधुर भाषा,जो हर चेहरे पर खुशी लिखती है !

मैं हिन्दू हूँ 💞🕉️🚩🙏

" दोस्ती ही तो है जो जिंदगी के एक रंग में भी कई रंग दिखाती है। 💞