"स्वच्छता" ही स्वस्थ और शान्तिपूर्ण जीवन का मूल मंत्र : यह समाज हमारा है, इसलिए हम इसकी सेवा कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
सेवा कार्यों की प्रेरणा के पीछे हमारा स्वार्थ नहीं है। हमें अपने अहंकार की तृप्ति और अपनी कीर्ति-प्रसिद्धि के लिए सेवा-कार्य नहीं करना है। यह अपना समाज है, अपना देश है, इसलिए हम कार्य कर रहे हैं। स्वार्थ, भय, मजबूरी, प्रतिक्रिया या अहंकार, इन सब बातों से रहित आत्मीय वृत्ति का परिणाम है यह सेवा। " 





"नालासोपारा (पश्चिम ) स्वास्थ्य केंद्र पर स्वछता का कार्य किया गया! "
*सेवा कार्य*                                    
   आज 1st सितंबर
 2019 ( 17 भाद्रपद
 शुक्ला द्वितीया, रविवार, विक्रम संवत् 2076 ) अपने
 नगर के द्वारा नालासोपारा प. के स्वास्थ्य केंद्र पर स्वछता का कार्य किया गया, वहाँ की स्थिति बहुत ही विचारणीय है, डॉ मनीष पाण्डेय जी वहाँ पर अभी नये नियुक्त हुए हैं इस विषय को उन्होंने संज्ञान में लेते हुए अपने को संपर्क किया, जिसमे आज अपने नगर से कुल १७ स्वयंसेवक एवम महानगर पालिका के कुछ सदस्य के द्वारा एक उत्कृष्ट कार्य किया गया !!
सेवा प्रमुख संतोषकुमार भागीरथी पाण्डेय ( From 2019 to 2022 ) 


हमें सबसे पहले हम जो हैं, वह बनना पड़ेगा।” इस “हम” की पहचान, अपनी आध्यात्म आधारित और इसीलिए एकात्म और सर्वांगीण जीवनदृष्टि से जुड़ी हुई है। हिमालय से लेकर अंडमान तक फैली इस भूमि पर रहने वाला विभिन्न भाषा बोलने वाला, अनेक जातियों के नाम से जाना जाने वाला, अनेक उपास्य देवताओं की उपासना करने वाला, यहां पर सदियों से रहने वाला, प्रत्येक समाज “हम” की इस पहचान को साझा करता है और इसे अपना मानता है। इस पहचान को लोग जानते हैं। उसे अनेक नामों से पहचानते हैं। यह हमारी पहचान - “एकम् सत् विप्राः बहुधा वदन्ति।”, “विविधता में एकता”, “प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश है”, और “उस” ईशतत्व से जुड़ने के मार्ग प्रत्येक के, उसकी रूचि, प्रकृति और पात्रता के अनुसार, विभिन्न हो सकते है, केवल “उस” से जुड़ने की, “उस” से नज़दीक जाने की दिशा में जीवन सतत चलना चाहिए। इन चार प्रमुख बातों पर आधारित हमारी यह “पहचान” है। वह जीवन के हर क्षेत्र में अभिव्यक्त होती दिखनी चाहिए यही “हम जो हैं, वह बनने” का मर्म है।


स्वच्छता ही सेवा अभियान- ‘स्वच्छता’ ही स्वस्थ और शान्तिपूर्ण जीवन का मूल मंत्र : 
साफ-सफाई एक अच्छी आदत है, स्वच्छ पर्यावरण और आदर्श जीवन शैली के लिये हर एक को यह आदत बनानी चाहिये। “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मानसिकता का विकास होता है” इसी के मद्देनजर देश में स्वच्छता की महती आवश्यकता को देखते हुए हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने स्वच्छता अभियान शुरु किया। हमें ये समझना चाहिये कि ये केवल हमारे प्रधानमंत्री का कार्य नहीं है, बल्कि समाज में रहने वाले हर इंसान की जिम्मेदारी है। हम सब के स्वस्थ जीवन के लिये इस अभियान में हमें कंधे से कन्धा मिलकर भाग लेना चाहिये। इसकी शुरुआत घरों, स्कूलों, कालेजों, समुदायों, कार्यालयों, संस्थानों से हो जिससे कि देश में व्यापक स्तर पर स्वच्छ भारत क्रांति हो। हमें खुद को, घर, अपने आसपास, समाज, समुदाय, शहर, उद्यान और पर्यावरण आदि को रोज स्वच्छ रखने की जरुरत है।

मैं आप सब को याद दिलाना चाहता हूँ कि हम सत्याग्रह भूमि के लोग हैं। हमारा इतिहास स्वर्णिम रहा है। हमारी भूमि से सत्याग्रह सफल हुआ है। अब स्वच्छाग्रह को आगे ले जाना है। स्वच्छता ही सेवा के भाव से काम करना है ! 



SantoshKumar B Pandey at 6.15PM.

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